मुफ़्त BGM2:35
विलो की धारा
柳のせせらぎ
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वही धारा विलो की छाँव से थोड़ी अलग दिखती है। पत्तों के बीच से छनती रोशनी पानी पर बिखर जाती है, और लगता है सिर्फ़ बाँसुरी ही उस नक़्श को छू सकती है। जिस जगह कभी किसी के साथ आए थे, आज वहाँ अकेले चल रहे हो। इसे अकेलापन नहीं कहेंगे — बस छाँव की हवा थोड़ी ठंडी है। पानी कल जैसा ही है, बस तुम थोड़े बदल गए हो।
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